महाप्रतापी सम्राट महाराणा प्रताप के बारेमे थोड़ी जानकारी।

Image Credit : Puchu [CC BY-SA 3.0], via Wikimedia Commons 
 हेलो फ्रेंड्स इस आर्टिकल में में आप लोगो को महाराणा प्रताप के बारेमे बताने जा रहा हु।
महाराणा प्रताप मेवाड़ के महान हिंदू शासक थे। महाराणा प्रताप का जन्म 9 May 1540 को मेवाड़ में हुआ था। महाराणा प्रताप ने मेवाड़ को बचाने के लिए कई लड़ाइआ लड़ी थी। और अपने जीते जी मुघलो को मेवाड़ में घुसाने तक नहीं दिया था। महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था। महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा चेतक था। महाराणा प्रताप की तरह ही उनका घोड़ा चेतक भी काफी बहादुर था। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कुल 11 शादियां की थीं। कहा जाता है कि उन्होंने ये सभी शादियां राजनैतिक कारणों से की थीं। महाराणा प्रताप के 17 बेटे और 5 बेटियां थीं। महारानी अजाब्दे से पैदा हुए अमर सिंह उनके उत्तराधिकारी बने थे। महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था।


 हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था। अकबर और महाराणा प्रताप के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था। हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लडने वाले सिर्फ एक मुस्लिम सरदार था उसका नाम हकीम खां सूरी था। हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे और जब की अकबर के पास 85000 सैनिक थे। फिर भी महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे थे। अकबर ने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए 6 शान्ति दूतों को भेजा था, जिससे युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जा सके, लेकिन महाराणा प्रताप ने हर बार उनका यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। युद्ध के दौरान मुगल सेना उनके पीछे पड़ी थी तो चेतक ने महाराणा प्रताप को अपनी पीठ पर बैठाकर कई फीट लंबे नाले को पार किया था। हल्दीघाटी की लड़ाई में उनका वफादार घोड़ा चेतक गंभीर रूप से जख्मी होने की वजह से मारा गया था। आज भी चित्तौड़ की हल्दी घाटी में चेतक की समाधि बनी हुई है। ऐसा माना जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे।


महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई थी।
एक दिन महाराणा प्रताप शिकार करने के लिए जंगल में जा रहे थे। उस वक्त जंगल कुछ हादसा होने की वजह से महाराणा प्रताप की मृत्यु हो गयी थी। तब महाराणा प्रताप की उम्र 57 साल थी।
महाराणा प्रतापकी मौत के बाद उनके बेटे ने मेवाड़ अकबर को सौंप दिया था।

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