ये है, धन वर्षा, ऐश्वर्य, विजय और असाधारण शक्ति का रहस्य।

भगवद गीता पढ़ने वाले और समज ने वाले जीवन में बहुत ज्यादा सफल हो जाते है। में यहाँ धन वर्षा, ऐश्वर्य, विजय और असाधारण शक्ति कैसे प्राप्त होती है, इस विषय में थोड़ी बात बताने वाला हु। भगवद गीता को महात्मा गांधीजी, एल्बर्ट आइंस्टीन ये लोग भगवद गीता पढ़ा करते थे। गांधीजी के जीवन में जबभी कभी दुःख आ जाता था, अपने आपको अकेला महसूस करते थे तब महात्मा गांधीजी भगवद गीता पढ़कर अपने मार्ग का रास्ता ढूंढ लेते थे। में यहाँ भगवद गीता के १८वे अध्याय का ७८वा श्लोक के बारेमे बताने वाला हु।

धन वर्षा, ऐश्वर्य, विजय और असाधारण शक्ति का रहस्य।

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यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।७८।।
जहा योगेश्वर कृष्ण है और जहा धनुर्धर अर्जुन है, वहा ऐश्वर्य, विजय, असाधारण शक्ति और नीति निश्चित रूप से रहती है। ऐसा मेरा मानना है, ऐसा संजय धृतराष्ट्र से कह रहे है। कुछ लोग कहते है, मैंने भगवद गीता पढ़ी पर मुझे कुछ समज में नहीं आया। कैसे समज में आएगा। अच्छे लोग और भगवद गीता इतनी आसानी से समज में नहीं आएगी। गीता को बार बार पढ़ना होगा और अच्छे लोगों को बार बार समज ने के बाद ही समज में आएंगे। भगवद गीता को पढ़कर समज लेने के बाद पैसा, ऐश्वर्य, विजय, चरित्र, नैतिकता और असाधारण शक्ति अपने आप हमारे पीछे आएगी। हमें उसके पीछे भागना नहीं पड़ेगा। वो सब हमारे पीछे आयेंगे। भगवद गीता को पढ़ने से हमारी दृष्टि स्वच्छ हो आती है। जबतक हमें लक्ष्य ठीक से दिखाई नहीं देगा, तब तक हम उस लक्ष्य को भेद नहीं सकेंगे। जब हमें लक्ष्य नजर आने लगेगा, तभी हम उस लक्ष्य को निशाना बना सकेंगे। गीता के अमूल्य श्लोक को समजने से हमारा चरित्र प्रबल हो जाता है। जब हमारा चरित्र प्रबल हो जाएगा, तब हमें हमारे आसपास की सारी कठिनाइया बहुत छोटी लगने लगेगी।
हमेशा मेहनत करके ही धन कमाना चाहिए। संस्कार के साथ व्यापार कीजिये। भक्ति को वैराग्य के साथ कीजिये।

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